एक समय के बाद अपने ही नहीं पराए भी जवाब मांगने लगते हैं ∣ इम्तिहान की घड़ी में धैर्य और दुख की घड़ी में सहनशक्ति उतनी ही जरूरी है जितना की धरती को सूरज की रोशनी ∣ कितनी अजीब बात है न अक्सर सब के बारे में सोचने वाले खुद के बारे में ही नहीं सोच पाते हैं ∣ मुश्किल तब हो जाती है जब हम खुद ही नहीं समझ पाते हैं कि हमें आगे क्या करना है? मोहब्बत और इजहार दोनों की अपनी एक अलग परिणति है ∣
वो बात जो जरूरी है