जिस तरह एक माली अपने बगीचे के हर फूल को अपना मानता है उसे हर तूफान से बचाता है ∣ समय समय पर उसे पानी देता है ∣ उसका ख्याल रखता है ∣ उसके लिए उसकी दुनिया उसका बगीचा होता है ∣ ठीक उसी तरह हमारे माँ बाप होते हैं जो हर तरह की परेशानी से दूर रख अपने बच्चों को एक बेहतर जीवन देते हैं ∣ उनकी खुशी के लिए हर तरह की परेशानी सह लेते हैं ∣ पर अफ़सोस जब वहीं पेड़ बड़ा होता है तब उसे अपने अहम के अलावा कुछ और नहीं दिखाई देता है ∣ वो अपने माँ बाप को सबसे कम महत्व देने लगता है। एक बच्चा जब Nope दुनिया में आता है ∣ तब वो केवल अपने मां बाप के स्पर्श को ही समझता है। पर जैसे जैसे वो बड़ा होता है ∣ वैसे माँ बाप का पूरा ध्यान उनकी जरूरत को पूरा करने में लग जाता है ∣ अपने बच्चों के नाम अपनी सारी सम्पत्ति कर चूके माँ बाप केवल दर दर की ठोकरे खाने को मजबूर हो जाते हैं ∣ केवल उनके पास शेष बचती है बेबसी जिसके साथ वो जीते हैं ∣ आज के समय हमारे आस पास हर दूसरे घर में बागवान की कहानी मौजूद है। फर्क महज इतना है कि उसे कहीं बयां नहीं कर जा रहा है ।
वो बात जो जरूरी है