हम सब में इतनी हिम्मत तो होनी चाहिए कि हम अपना दुख खुद बांट सकें। किसी और की हमदर्दी की हमें जरूरत न पड़े। हम सब एक ऐसी रेस का हिस्सा हो गए है जिसका अंत कहां है ये हमें पता ही नहीं है। दूसरे हमारे बारे में जो सोचे इसे भले हमें ज्यादा फर्क न पड़े। लेकिन हम अपने बारे में क्या सोचते हैं ये हमारे लिए बहुत मायने रखता है। मन की शक्ति से बड़ी कोई शक्ति नहीं जो तुम्हें बुरे से बुरे हालातों में मजबूत बनाती है।
वो बात जो जरूरी है