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Showing posts from March 21, 2021

डर के आगे

कुछ काम करना हो या जीवन का कोई अहम पहलू चुनना हो हम अक्सर यहीं कशमकश में जीवन का कोई फैसला नहीं ले पाते कि लोग क्या कहेगे इस बारे में और क ई बार दूसरे के बारे में सोचते हुए हम अपने जीवन के अहम फैसले उन लोगों के हाथ पर दे ते है जो हमें ढ़ग से जानते भी नहीं है  कहते हैं कि एक फैसला हमारी जिंदगी नहीं बदलती एक सोच हमारी जिंदगी नहीं बदलती किन्तु एक परिवर्तन जिंदगी में ऐसा लाना जो हमारी जिंदगी बदले दे मायने रखता है कि हम उसका फैसला ले लोग दुनिया  हमारे इस कदम उठाने पर क्या कहती है  ये सोचकर अगर हम रह जाएंगे तो हम अपने जीवन के अनेक फैसले लेने में डगमगा जाएंगे  इसलिए हमें जब खुद के लिए कुछ चुनना है तो वो हम अपने हिसाब से चुने क्योंकि हमारी जिंदगी में आने वाला हर बदलाव जितना हम पर असर डालता है उतना किसी पर नहीं डर डर के जीना भी  क्या जिंदगी  होती है एक आवाज  खुद के लिए बुलंद करने की बात ही अलग होती है दूसरों सोचते हैं जो भी हमारे बारें  हमारी भी तो खुद के प्रति कोई  सोच होती है  वो जिंदगी में आगे निकल पाते हैं  जो कुछ करने की ठाने तो रास्त...

विश्व कविता दिवस

जब व्यक्ति अनुभव और अभिव्यक्ति के माध्यम से कोई रचना करता है जिसमें गेयता उसका मुख्य लक्षण होता है साथ ही प्रतीकों और बिम्ब का उपयोग किया जाता है तब कविता का जन्म होता है  जिसमें जयशंकर प्रसाद की कविता हो, सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता हो, निराला की कविता हो, शिव मंगल सुमन या अकाल पर लिखी हुई नागार्जुन कविता हो ये पाठकों को भावविभोर कर देती है  वहीं रवींद्र नाथ टैगोर की कविता हो, टी एस एलियट की जो हमें  बार - बार पड़ने को मजबूत कर देती है푐 एक दम से नहीं लिखी जाती कविता इसे लिखने के लिए व्यक्ति को बड़ी मशक्कत करनी पड़ती है तब लिखी जाती है कविता कैसे लिखी जाती कविता जब हो अनुभव से अनुभूति  जिसमें गेयता की हो राग रंगीन जिसमें हो प्रतीकों और बिम्ब का प्रयोग तब होती वो कविता ऐसे ही घर पर बैठे नहीं लिखी जाती कविता.