जब व्यक्ति अनुभव और अभिव्यक्ति के माध्यम से कोई रचना करता है जिसमें गेयता उसका मुख्य लक्षण होता है साथ ही प्रतीकों और बिम्ब का उपयोग किया जाता है तब कविता का जन्म होता है
जिसमें जयशंकर प्रसाद की कविता हो, सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता हो, निराला की कविता हो, शिव मंगल सुमन या अकाल पर लिखी हुई नागार्जुन कविता हो ये पाठकों को भावविभोर कर देती है
वहीं रवींद्र नाथ टैगोर की कविता हो, टी एस एलियट की जो हमें बार - बार पड़ने को मजबूत कर देती है푐
एक दम से नहीं लिखी जाती कविता इसे लिखने के लिए व्यक्ति को बड़ी मशक्कत करनी पड़ती है तब लिखी जाती है कविता
कैसे लिखी जाती कविता
जब हो अनुभव से अनुभूति
जिसमें गेयता की हो राग रंगीन
जिसमें हो प्रतीकों और बिम्ब का प्रयोग
तब होती वो कविता
ऐसे ही घर पर बैठे नहीं लिखी जाती कविता.
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