ये बचपन क्या कहुँ इसे,जब कोई चीज चाहिये होती थी तो रोने का बहाना करते थे जब अब बड़े हुये तो रोने के लिये सोने का बहाना करते हैं। बचपन में जब दोस्त से बात नहीं करनी होती थी,तो गुस्सा करने का बहाना करते थे, बड़े हुये तो दोस्त से मिलने का बहाना करते है । जब स्कूल की छुट्टी होती थी घर जाने की जल्दी होती, जब टीचर क्लास में नहीं आते थे न जाने कितनी खुशी होती थी । जब पेपर में नंबर कम नंबर आते थे तो भी हम खुश हो जाया करते थे अपनी क्लास के मॉनीटर का कितना सिर पकाते थे मैडम जब भी चुप ऱहने को कहे तभी हम बक -बक कर जाते थे। क्लास अपना रोब जमाते थे दोस्त को कितना चिढ़ाते थे । कुछ भी कहो यारो ये बचपन के दिन बड़े प्यारे थे ।
वो बात जो जरूरी है