'गणतंत्र' एक ऐसा तंत्र जिसमें जनता का प्रतिनिधित्व होता है। जहां जनता अपनी सरकार का स्वयं चयन करती हो। वहां जनता के लिए, जनता के द्वारा बनाया गया शासन रहता है जिसे हम गणतंत्र की संज्ञा देते है। किन्तु जब बात भारत की आती है तब हम उसके एक अलग ही रुप को पाते है। जो वहीं भूमि है जहां पर त्रासदी से त्रस्त लोग जब निवास करने आएं तब उन्हें ये सुकून था कि वो यहां पर सुरक्षित रहेंगे। जहां आज भी अनेकता में एकता की बातें की जाती है। जहां दो कोस पर भाषा और बोली बदल जाती है। किन्तु अगर बात इस अनेकता को खत्म कर केवल एक ही को सम्पूर्ण ताकत देने की आ जाएं, तब इस प्रश्न करना जरुरी हो जाता है पूरी दुनिया को 'वसुधैव कुटुम्बकम्' का पाठ पढ़ाने वाला क्या आज अपने देश में ही इसका पालन कर रहा है? तो इसका उत्तर हां है, जहां आज भी भारत एक ऐसा देश है। जहां विविधता के बावजूद सब एक ही झंडे के नीचे खड़े हुए नजर आते है। भले उनका धर्म अलग हो किन्तु सबके दिल सिर्फ भारत के लिए धड़कते है। इसके बावजूद कुछ लोग है जो इस विविधता को खत्म करने की कोशिश करते नजर आते है। किन्तु वो शायद ये भूल जाते है...
वो बात जो जरूरी है