आने वाले समय में युद्ध शस्त्र से नहीं बल्कि ज्ञान से लड़ा जाएगा..शायद ये बात ज्योतिबा फुले पहले ही समझ चुके थे..जिन्होनें अपनी पत्नी सावित्री बाई फुले को न सिर्फ पढ़ाया बल्कि प्रेरणा भी दी..कि वो लड़कियों को पढ़ाए।ताकि वो एक बेहतर समाज का निर्माण कर सके.. क्या है फुले मूवी का कहानी अग्रेजों की गुलामी सिर्फ 200 साल पुरानी है..लेकिन नारी तो सर्दियों से गुलाम है...ये वाक्य इस मूवी का सारा कह देता है..जहां नारी शिक्षा पर जोर दिया गया है...इस मूवी की कहानी ब्रिटिशकालीन उस दौर की है..जिस समय देश में अग्रेजों का बोलवाला था..भारत में वर्ण व्यवस्था अपने चरम पर थी..ऐसे में क्रांति की अलख लिए ज्योतिबा फुले किस तरह से जाति व्यवस्था खत्म करने की कोशिश करते है..उनकी पत्नी सावित्री बाई फुले कैसे नारी शिक्षा की अलख जागती है..इसी पर आधारित ये मूवी है.... अनंत महादेवन के निर्देशन में बनी फुले मूवी भारत के इतिहास को काफी करीब से देखती है... जिसमें प्रतीक गांधी ने ज्योतिबा फुले जबकि सावित्री बाई फुले के किरदार में पत्रलेखा नजर आयी है.. .जो अपनी अदाकरी से इतिहास में हुई घटना को बखूबी दिखा...
वो बात जो जरूरी है