अखबार हो या खबर देखने के लिए टीवी ज्यादातर हमें ऐसी की खबर देखने को मिलती है जिसे देखकर हम ये सोचने को मजबूर हो जाते हैं कि आज सच में क्या मनुष्य में नैतिकता खत्म हो जा रही है या वो कभी थी ही नहीं अगर हम भारतीय साहित्य को उठाकर देखे तो हम पाएंगे जब जब मर्यादा टूटी है तब तब प्रलय आयी है जिसकी कीमत एक स्त्री ने चुकायी है भले वो द्वापरयुग में आयी दुर्योधन जो बदला लेना चाहता था पांडवा पुत्र से किन्तु शतरंज के खेल में युधिष्ठिर की बोली लगाने को विवश करने से लेकर द्रोपदी के वस्त्र हरण तक मर्यादा की बात की गयी है महाभारत में युद्ध का कारण भले ही राज्य साम्राज्य को लेने के लिए हुआ जैसा प्रतीत हुआ हो किंतु उसका तत्कालीन कारण द्रौपदी के वस्त्र हरण था. जब मर्यादा टूटी तब तब युद्ध हुए. धर्मवीर भारती का लिखा हुआ अंधा युग में एक कविता की पंक्ति हम सब पाठकों को मर्यादा की वास्तविकता बताती है जो वो कहते हैं " मर्यादा मत तोड़ो तोड़ी हुई मर्यादा कुचले हुए अजगर सी तुम को कुचल कर रख देगी".
वो बात जो जरूरी है