आज हम इंसान तो नहीं है। जहां हर वक़्त हम दूसरों को नीचा गिरने के लिए खुद नीचे गिरते जा रहे हैं। आज जो जितना धूर्त उतना अच्छा जो जितना सीधा वो उतना मूर्ख बन गया है। इंसान लोमड़ी जैसी चालाकी सीखते कुत्ते जैसी वफादारी भूल गया।
वो बात जो जरूरी है
वो बात जो जरूरी है