"युध्दोपरान्त, यह अन्धायुग अवतरित हुआ जिसमें स्थितियां, मनोवृत्तियां, आत्माऐं सब विकृत है एक पतली सी डोर मर्यादा की पर वह भी उलझी है दोनों ही पक्षों में. " धर्मवीर भारती द्वारा लिखित 'अंधा युग' महाभारत को एक अलग दृष्टि से प्रस्तुत करता है जिसमें पात्रों के माध्यम से कई सवाल उठाऐ. अंधा युग में ज्यादा तर संवाद कविता के माध्यम से कहे गए हैं जिसमें से कुछ पंक्ति इस तरह है " मर्यादा मत तोड़ो तोड़ी हुई मर्यादा कुचले हुए अजगर - सी गुजलिका में कौरव - वश को लपेट कर सूखी लकड़ी - सा तोड़ डालेगी. " महाभारत के संदर्भ में इसे देखे तो महाभारत का युग केवल राज्य साम्राज्य और सिंहासन को लेने के लिए ही नहीं पाण्डवों ने किया था बल्कि इसका एक कारण दुर्योधन के द्वारा तोड़ी गयी मर्यादा भी थीं. " वर्तमान समय में अगर हम आज के किरदार के साथ महाभारत लिखना चाहे तो इसके लिए बहुत समझ और अध्ययन की आवश्यकता होगी."
वो बात जो जरूरी है