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बचपन

ये बचपन क्या कहुँ इसे,जब  कोई चीज चाहिये होती  थी तो रोने का बहाना करते थे
जब अब बड़े हुये तो रोने  के लिये सोने का बहाना करते हैं।
बचपन में जब दोस्त से बात नहीं करनी होती  थी,तो गुस्सा करने का बहाना करते थे,
बड़े हुये तो दोस्त से मिलने का बहाना करते है ।
जब स्कूल की छुट्टी होती थी घर जाने की जल्दी होती, जब टीचर  क्लास में नहीं आते थे
 न जाने कितनी खुशी होती थी ।
जब पेपर में नंबर कम  नंबर आते  थे तो भी  हम खुश हो जाया करते थे
अपनी क्लास के मॉनीटर का कितना सिर पकाते थे
मैडम जब भी चुप ऱहने को कहे तभी  हम बक -बक कर जाते थे।
क्लास अपना रोब जमाते थे
दोस्त को कितना चिढ़ाते थे ।
कुछ भी कहो यारो ये बचपन के दिन बड़े प्यारे थे ।

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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..