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जब बात हिन्दी की हो





भाषा वो माध्यम जिसके जरिए व्यक्ति अपने विचारों का आदान प्रदान करता है। 
जब एक बच्चा इस दुनिया में कदम रखता है तब वो सब पहले जिस भाषा को बोलता है वो उसकी 'मातृभाषा' होती है । इस भाषा के जरिए न सिर्फ वो संवाद करता है बल्कि अपने सर्जन के कौशल को भी वो बढ़ाता है। 
जब बात मातृभाषा के उन्नति  की आती है।  तब हिन्दी साहित्य के जनक भारतेन्दु  हरिश्चंद्र का जिक्र करना जरूरी हो जाता है जिनके अनुसार
निज भाषा उन्नति अहे, सब उन्नति को मूल, बिन निज भाषा ज्ञान के, मिटन न होय के सूल'। अर्थात मातृभाषा की उन्नति के बिना किसी भी समाज की उन्नति नहीं हो सकती है बिना भाषा के ज्ञान के व्यक्ति को अपने मन की पीड़ा को दूर करना मुश्किल होता है।
भारतेन्दु ने भाषा का उपयोग लोगों में चेतना जाग्रत करने के लिए किया था। इसमें उनका प्रसिद्ध नाटक 'अंधेरी नगरी चौपट राजा' को कैसे भूला जा सकता है। जो आज भी लोगों के बीच काफी लोकप्रिय है ∣
 जहां कालिदास की रचनाओं में शकुन्तला हो या विक्रमादित्य का नाटक वो मूल रूप से संस्कृत भाषा में लिखा गय़ा था।
वहीं गोस्वामी तुलसीदास के द्वारा रामचरित मानस को अवधी भाषा में लिखा गया है। 
आगे चलकर संस्कृत सभी भारतीय भाषाओं का जननी बनी जिसके जरिए अन्य भारतीय भाषाओं का जन्म हुआ ।
 भाषा की कठिनता को देखते हुए इसके सरल रूप को लाये जाने की कोशिश की गयी। जिसके बाद अपभ्रंश भाषा के रूप में हिन्दी भाषा का जन्म हुआ ।
जो कि एक वैज्ञानिक भाषा है जो जैसी बोली जाती है वैसी ही लिखी जाती है। इसकी लिपि देवनागरी है ∣
इस भाषा खूबसूरती की अगर हम बात करें तो इसने सब भाषा के शब्दों को अपने अंदर समेट लिया है। बात चाहे उर्दू की हो या फारसी या अंग्रेजी की सबको इसने अपने अंदर शामिल कर लिया है।
 यहीं कारण है कि आज भी दुनिया में बोली जाने वाली भाषा में अंग्रेजी, चीन की मेंड्रेन भाषा के बाद, हिन्दी तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है।
जहां संस्कृत भाषा कठिन होने के चलते लोगों से दूर होती गयी। वहां हिन्दी भाषा ने अपनी सरलता के चलते हर किसी को अपना बना लिया।
इसी के विकास को विस्तार देते हुए
14 सितम्बर 1949 को भारत ने राजभाषा के रूप में हिन्दी को स्वीकार किया गया था ∣ बता दें इसके तहत शासकीय कार्य के लिए हिन्दी का प्रयोग करना था ∣ 
इसके अलावा हिन्दी को सबकी जनभाषा बनाने के उद्देश्य से भारतीय संविधान के भाग 17 में राजभाषा को शामिल किया गया है ∣  इसमें अनुच्छेद 343 से 351 तक हिन्दी के लिए अनुच्छेद थे ∣


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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..