सुनो लो बेटी

 

अगर तुम देखती हो ख्वाब 

ऊंचाई पर चढ़ने की तो 

कड़क कर लो अपने हाथ

जिन हाथ में तुमने कभी चुड़ियाँ पहनी थी , 

उनमें अब तुम कड़क पना रख लो

जिन पैर में कभी पायल पहनी थी 

उनमें ऐसे चप्पल पहना लो

जो तुम्हारी सुरक्षा कर सके

क्योंकि आज न तुम्हारा 

अपना न पराया कोई नहीं है 

इतना विश्वास करने वाला, 

अब वक्त आ गया है अपनी

सुरक्षा करने का जिम्मा स्वयं लेने का 

जागों मेरी नन्ही दुलारी बेटी

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