वो अल्फाज ही क्या
जो दिल से न निकले हो
वो दोस्त ही क्या जिसको
आपकी कदर न हो।
वो लोग ही क्या जिनमें
संवेदना न हो।
वो तरक्की ही क्या
जिसमें अपनो का साथ न हो।
वो शिकस्त ही क्या
जिसके लिये खेद न हो।
जो दिल से न निकले हो
वो दोस्त ही क्या जिसको
आपकी कदर न हो।
वो लोग ही क्या जिनमें
संवेदना न हो।
वो तरक्की ही क्या
जिसमें अपनो का साथ न हो।
वो शिकस्त ही क्या
जिसके लिये खेद न हो।
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