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अब नहीं सोचा तो


आज क्या हम अनुमान लगा सकते हैं कि हमारी स्थिति बिल्कुल वैसी है जैसी पहले थी.

आज बात करते हैं हम अपनी आर्थिक स्थिति की.

यू तो देश में   मंदी छायी हुई है जिसके कारण न तो कोई रोजगार का निर्माण हो रहा है .

जिसके चलते आधे से ज्यादा लोगों ने अपनी नौकरी गंवा दी है .

दूसरी तरफ देश में लगातार मुद्दा का मूल्य कम हो रहा है जिसके कारण मंहगाई बढ़ रही है जो चीज दस की आती वो बीस से पच्चीस रूपये की हो गयी है.

जिसका असर लोगों पर यह पड़ा है कि लोगों की सैलरी तो नहीं बढ़ी लेकिन उसमें कटौती जरूर हो गयी है और उन्हें दो रोटी खाने की वजह एक रोटी से ही काम चलाना पड़ रहा है.

आज जहाँ एक तरफ अमीर वर्ग और अमीर होता जा रहा है वही गरीब और भी गरीब होता जा रहा है.

आज उन मध्यम वर्ग की हालत खराब हो गयी है जो पहले सुधरी थी.

और सबसे नीचे तबके की  हालत और भी बुरी हो गयी है.

दोस्तों ये न तो मुझे मालूम और न आपको कि कोरोना वायरस का वैक्सीन कब बनेगा और कब हमको लगेगा.

किन्तु तब तक हमें उचित सामजिक दूरी तो रखनी होगी.

साथ ही साथ  अपने घर को चलाने के लिए   अपने उन गुणों का प्रयोग करना होगा जिसे की हमारा घर भी चल  जाए और लोगों की जरूरत भी पूरी हो जांए क्योंकि  " आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है ".

हम सब को इस बात को भी समझना होगा कि आजादी केवल बोलने और लिखने की ही नहीं है बल्कि अच्छा जीवन जीने की भी है.

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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..