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परीक्षा



परीक्षा एक ऐसा शब्द जिसके लिए हर कोई बहुत गम्भीर होता है यू तो परीक्षा के मायने बहुत बदल गए हैं लेकिन आज भी परीक्षा क ई के लिए उनकी जिंदगी होती है.

वैसे तो हम सब ने अपने बोर्ड परीक्षा को बहुत गम्भीर माना है किन्तु  आज हम केवल परीक्षा पढ़ाई के क्षेत्र में ही नहीं दे रहे हैं बल्कि हम हर उस क्षेत्र में दे रहे हैं जहाँ पर हम ये जानते हैं  कि वो काम सरल नहीं है किन्तु तब भी हम उसे करते हैं इसे हम ऐसे समझ सकते हैं कि हमारे सामने क ई बार ऐसी परिस्थिति आकर खड़ी हो जाती है जहाँ एक तरफ कुंआ तो दूसरी तरफ खायी होती है चारों तरफ परेशानी ही परेशानी  होती है

और फिर हमें इस परीक्षा से स्वयं उबरना पड़ता है .

आज इस विषय पर बात करते हुए मुझे  याद आया  है कि मैंने क ई साल पहले पढ़ा जिसमें  लिखा था " कि हमें अपने इम्तिहान का परचा स्वयं बनाना होता है और चेक भी स्वयं ही करना होता " जिसे में तब तो नहीं समझ पायी थी लेकिन अब कुछ इसके बारे में समझी हूँ.

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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..