परीक्षा एक ऐसा शब्द जिसके लिए हर कोई बहुत गम्भीर होता है यू तो परीक्षा के मायने बहुत बदल गए हैं लेकिन आज भी परीक्षा क ई के लिए उनकी जिंदगी होती है.
वैसे तो हम सब ने अपने बोर्ड परीक्षा को बहुत गम्भीर माना है किन्तु आज हम केवल परीक्षा पढ़ाई के क्षेत्र में ही नहीं दे रहे हैं बल्कि हम हर उस क्षेत्र में दे रहे हैं जहाँ पर हम ये जानते हैं कि वो काम सरल नहीं है किन्तु तब भी हम उसे करते हैं इसे हम ऐसे समझ सकते हैं कि हमारे सामने क ई बार ऐसी परिस्थिति आकर खड़ी हो जाती है जहाँ एक तरफ कुंआ तो दूसरी तरफ खायी होती है चारों तरफ परेशानी ही परेशानी होती है
और फिर हमें इस परीक्षा से स्वयं उबरना पड़ता है .
आज इस विषय पर बात करते हुए मुझे याद आया है कि मैंने क ई साल पहले पढ़ा जिसमें लिखा था " कि हमें अपने इम्तिहान का परचा स्वयं बनाना होता है और चेक भी स्वयं ही करना होता " जिसे में तब तो नहीं समझ पायी थी लेकिन अब कुछ इसके बारे में समझी हूँ.

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