अकेलेपन में सिमटते हम


आज समय का पहिया भले काफी तेजी से चल रहा हो किन्तु इससे लोगों को ज्यादा फर्क नहीं पड़ रहा है ∣ वो एकांत अवस्था में रहने के आदि से बनते जा रहे हैं ∣ जहां उन्हें दुनियादारी से कोई भी मतलब नहीं रह गया है ∣
 जहांअब हमें उस दुनिया के बारे में रूचि नहीं है ∣
आज एक पल भी खाली बैठकर सोचने से बेहतर हम  कुछ मनोरंजन चाहते है ∣ जो हमें दुनिया की चिंता से कहीं दूर ले जाएं। 
आज वास्तव में हम ने कुछ नया जानने की जिज्ञासा खो सा दी है ∣ 
 हमारे आस पास क्या हो रहा है इससे अब हमें कोई भी मतलब नहीं रह गया है ∣

Comments