किसी भी प्रक्रिया से निकलकर आगे कुछ करना ही जिंदगी की एक सीढ़ी
है बचपन में सीखने की प्रक्रिया, स्कूल में कक्षा 1से लेकर 12 तक की प्रक्रिया, कालेजों में सेमेस्टर की प्रक्रिया जो वैसे देखने में बिना नमक के खाने सी लगती है लेकिन उसे गुजरने का मजा ही कुछ होता है।
है बचपन में सीखने की प्रक्रिया, स्कूल में कक्षा 1से लेकर 12 तक की प्रक्रिया, कालेजों में सेमेस्टर की प्रक्रिया जो वैसे देखने में बिना नमक के खाने सी लगती है लेकिन उसे गुजरने का मजा ही कुछ होता है।
जिस प्रकार कुछ ऐसे लोग होते हैं जो जीवन को सफल बनने के लिए लगातार प्रयत्न करते रहते हैं । वो एक संघर्ष की प्रक्रिया से गुजरते हैं।
सृजन भी एक प्रक्रिया है जिसे गुजर कर व्यक्ति किसी चीज का निर्माण करता है। अक्सर लोगों का प्रश्न होता है कि सृजन कैसे किया जाता है वो भी हमारे जीवन में अनुभव से लेकर अभिव्यक्ति की प्रक्रिया होता है जिसे हम गुजरते हैं ।
इस समय लिखते वक्त मुझे इग्लिश के लेखक टी, एस इलियट की वो कविता याद आ गयी जिसमें
" परिकल्पना में सृजन के बीच
भावना में कर्म के बीच,
पड़ती है परछाई जिसे बनता जीवन
जीवन की भुगरता "।
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