कुछ बेहतर करने की आशा में
चल गुजरने की आशा में
ऐसा कुछ नया करने का ख्वाब हो तेरा
कुछ बेहतर बनने की आशा में ,
जैसे कितनी भी
काली रात हो
सुबह त़ो होती हर हाल में
कुछ कर गुजरने की आशा में ,
बिजलियां गिरती है तो गिर जाने दे
अपनी कहानी में और भी थोड़ा
कर जाने की आशा में ,
कांच के घड़े की तरह होती ये जिदंगी
जब तक है इसे सजाने सवारने की आशा में ,
पराए क्या अपने भी भूल जाएगे तुझको एक दिन
जब तक जिंदगी है
बेहतर बनने के लिए
अपने संघर्ष की हद पार करने की आशा में
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