अब लोग कुछ मौसम की
तरह बदलने लगे है
हम ये महसूस सा करने
लगे है।
कभी हँसना होता
था हमारे साथ
किन्तु अब रोने से लगे
जो कभी बात- बात पर
हम टोकते थे अब वही
लोग बेटी जैसे
हमें पराय करने लगे है
कभी जिनकी बातों से हम
खुद होते थे अब उनकी बातें ही
हमें बोझिल सी लगाने लगी है।
कभी बारिश की बूंदे अच्छी
लगती थी लेकिन
अब अपने भी पराऐ से
लगने लगे है
जो भी करते थे काम
तारीफ अब वो ही थोड़ा बोझिल सा लगे
है।
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