इम्तहान का महत्व हमारी जिंदगी में हो या न हो लेकिन ये हमें एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहूंचता है।
'शून्य से शिखर' तक पहुंचने के लिये हम कई तरह के इम्तहान देने पड़ते है कई बार हम इसे अपना पीछा छूटाते है तो कई बार हम इसमें फंस ही जाते है स्कूल के इम्तहान और जिंदगी के इम्तहान में फर्क सिर्फ इतना होता है कि स्कूल के इम्तहान में हम पढ़कर पास होते है।
" किन्तु जिंदगी के इम्तहान में हमें अपने इम्तहान का पेपर स्वयं बनना पड़ता है और भरना भी हमें खुद ही होता है और इसे चेक भी स्वयं को ही करना पड़ता है।
कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है। आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो।
Comments