दुनिया की सबसे बड़ी त्रासदी है स्त्री को सबकुछ मानना सिवाय इंसान के। जहां बंधनों के नाम पर केवल उसे जकड़ा जाया। पर जब बात उसके हक की आये तो कोई कुछ नहीं कह पाये। केवल इसलिए क्योंकि वो केवल एक स्त्री है।
कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है। आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो।
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