विचार करने की जरूरत है

 

आज हम किस दुनिया में जी रहे हैं जहाँ एक तरफ हम विजुअल दुनिया में कदम रख रहे हैं हम आनलाईन ज्यादा और आफलाईन कम रह रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर हमारे दिमाग की सोचने की क्षमता भी धीरे धीरे कम सी होती जा रही है आज हम किसी भी चीज़ को अपने फोन में देख सकते हैं फिर भी हम खुश नहीं है.

हजारों ऐसी चीज हमारे फोन में मौजूद है फिर भी आज हम खुद को अधूरा सा समझ रहे हैं हर चीज के उत्तर की तलाश के बावजूद हम खुद को खो चुके हैं.

आज हमें मौजूदा समय में ये सोचना चाहिए कि ज्यादा फोन के उपयोग से कही हम तनाव पूर्ण जिंदगी तो नहीं जी रहे हैं.

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