मुनिया सो जा भूखे पेट
कल तो कोई देने वाला होगा,
माँ वो देख चांद किस तरह हम पर
हंसता हो गा क्या वो भी हमारे लिए भूखा
होगा?
अरे नहीं मुनिया वो तो
चन्द्रमा है वो क्यों भूखा होगा.
माँ आसमान हम पर क्यों बरसता
क्या वो भी भूखा होगा?
अरे नहीं मुनिया वो आसमान है
वो क्यों भूखा होगा.
माँ देख नदी हमें चिढ़ाती है क्या
वह भी भूखी होगी?
वह भी भूखी होगी?
अरे नहीं मूनिया
वो तो नदियों की रानी है वो क्यों भूखी होगी.
माँ हम तो इंसान है
फिर क्यों हम सब
भूखे हैं
वो जो अमीर है उनकी झोली
आज पैसे से भरी है
हर गरीब की झोली आज
पैसे के बिन सूनी है.
"हम नहीं बेटा ये पूरी दुनिया के लिए
आज एक भंयकर सा तूफान है"
"माँ मैं तो नहीं मानती ऐसी दुनिया को
जहाँ खाली पेट और मुंह में राम है."
जहाँ खाली पेट और मुंह में राम है."
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