कपड़े और चरित्र का रिश्ता ऐसा बुन दिया गया है कि अगर किसी ने थोड़े ज्यादा कपड़े पहने है तो उसे बहन जी और थोड़े कम पहने है तो उसे चरित्रहीन की दृष्टि से देखा जाता है जिसमें बुरी सोच होती है और आरोप कपड़ों की लम्बाई पर लगा दिया जाता है
क्या कपड़े व्यक्ति के चरित्र का निर्माण करते हैं इस विषय पर चर्चा करते हुए मुझे स्वामी विवेकानंद का संस्मरण याद आ गया जब वो शिकागो विश्व धर्म सम्मेलन के लिए भाषण देने जाते हैं तो एक व्यक्ति उनके कपड़े पर कहता है कि अपने ये कैसे वस्त्र धारण किए हैं इस पर वो कहते हैं आपकी संस्कृति का निर्माण आपके दर्जी करते हैं जबकि हमारी संस्कृति का निर्माण हमारा चरित्र करता है
आज हम सब भले ही इस बात पर ज्यादा ध्यान नही दे किन्तु ये बात हमेशा हमें देखने को मिलती है जब किसी कालेज में किसी कार्यक्रम में लड़के भले भी कुछ भी कपड़े पहने किन्तु लड़कियों के लिए सलीके के कपड़े पहने का आदेश दे दिया जाता है बिना उसकी मर्जी भले ही हमारे संविधान ने हमें अनुच्छेद 21 के अनुसार सम्मान पूर्वक जीने की स्वतंत्रता दी हो
इसके विपरीत विदेश में denim jeans के द्वारा यौन हिंसा के विरोध में 24 अप्रैल को सभी लोग जींस पहनते है और उसके खिलाफ एक जुट होते हैं
आज हम सब को एक बार जरूर विचार करना होगा कि जहाँ पर हर दिन हर मिनट रेप की घटनाएं होती है दहेज के चलते उसे जला दिया जाता है गर्भ में ही उसकी हत्या कर दी जाती है वहाँ हम उसके कपड़ो पर प्रश्न करते हैं
बदलना होगा उस सोच को
जिसने हमारे कपड़ो को देखकर
हमारे चरित्र का विश्लेषण किया
बदलना होगा उस मानसिकता को
जिसने हर दिन हो रही उसके साथ हिंसा पर
मुंह अपना बंद किया
और उसके कपड़े को देखकर
उसके चरित्र का सर्टिफिकेट तैयार किया
बदलना होगा.
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