माँ



क्यों नहीं  हम तेरे जैसे माँ

तू चाहे कितनी भी नाराज हो

लेकिन हमेशा सब का ध्यान रखती हो 

पहले खाना हमको और फिर बाद में  तुम खाती हो 

आज भी इसलिए 

जब  भी चोट लगे  तो सबसे

पहले तुम ही याद आती हो

कितना भी बन जाएं  कामयाब हम

लेकिन तेरे सामने सब चीजे छोटी ही लगती है माँ  तेरे आगे जीवन कि हर खुशी फीकी सी लगती है

खुद की भी खुशियाँ मिल जाए  हमें  तुम बस यही दुआ करती  हो 
 आज भी  जब  चोट लगे हमें 
 तो सबसे पहले तुम ही याद  आती हो.



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