इस दुनिया में स्त्री होना ही त्रासदी है जहां शादी और बच्चे के अलावा उसके जीवन में कोई प्राथमिकता नहीं समझी जाती है।
शर्म के नाम पर मौन, अंधविश्वास के नाम पर श्रद्धा और सुरक्षा के नाम बंदिश उसे दी जाती है।
एक महिला का आर्थिक, शारीरिक , मानसिक रूप से मजबूत होना इसलिए भी जरूरी है ताकि उसे उसकी सीमा न बताई जाए।
सुंदरता के तराजू में उसे तौला, रूप के जाल में उसे इतना अंधा कर दिया कि खुद को देह बनाने के चलते इंसान होना भूल ही गयी।
Comments