इरादे तेरे नेक है
तो शर्म कैसी
जब पंख मिले हैं
तुझे उड़ने में
तो हिचकिचाहट कैसी।
तेरे इरादे है जब नेक
भीड़ से अलग तू
खुद को देख
अस्तित्व की पहचान में
भाग रह तू
चुनौतियों के सामने घुटने न टेक।
भीड़ से अलग तू
खुद को देख
अस्तित्व की पहचान में
भाग रह तू
चुनौतियों के सामने घुटने न टेक।
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