आज लोगों को मूर्ख बनाने का दिन है जो की लोग एक दूसरे को रोज बनाते है महज फर्क इतना हो जाता है कि व़ो हर दिन उनसे साफ शब्दों में ये नहीं कह पाते हैं कि हमने आपको उल्लू बनाया बड़ा मजा आया
आज जब हम अपने चारों तरफ
देखें तो पाएगें कि हर कोई व्यक्ति एक दूसरे व्यक्ति को मूर्ख बनाने में लगा हुआ है और ऐसा करते हुए वो ऐसा सोच रहा है कि लोग उसकी बातों को बहुत गम्भीर ले रहे हैं जबकि वास्तविकता ऐसी है नहीं सिवाय राजनीति के
जहाँ हर दिन जनता को मूर्ख बनाया जाता है उससे बड़े - बड़े सपने तो दिखाए जाते हैं किन्तु वास्तविक में कुछ होता नहीं है
दूर के ढोल सुहाने लगते हैं जब वो हमारे नजदीक आते हैं तो वो हमें कर्ण प्रिय न लग कर हमारे कानों को अप्रिय प्रतीत होते हैं
आज ऐसा ही कुछ हम राजनीति में देखते हैं
आज श्रीलाल शुक्ल के रागदरबारी के कई पात्र हम अपने आस पास पाएगें किन्तु अफसोस आज बाबू रंगनाथ बाबू जैसे युवा बहुत कम है
आज मूर्ख दिवस पर हम सब को एक बार जरूर गहन विचार करना चाहिए कि हम कही खुद क़ो ही तो मूर्ख नही बना रहे हैं और
अपने आप से झूठ बोल रहे हैं .
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