युवा

"मत ठहरो तुमको चलना ही चलना है" युवा ये नाम ही हमारे मन में एक ऊर्जा सी पैदा करता है। युवा को हमेशा कुछ नया सीखने की ललक होनी चाहिये। अपनी सीमा से बाहर निकल कर काम करना चाहिये।जो वो है उसे बेहतर बनने की कोशिश करना चाहिये। ऐसा कोई भी काम नहीं जो ये नहीं कर सकता । पूरा करने के लिये जज्बा चाहिये। आज के समय में युवा के सामने सबसे बड़ी समस्या इतने सारे भटकाव का होना है। उसे सही राह दिखाने वाले की कमी है । जिस कारण से वो बहुत थका और स्वयं को हार हुआ समझने लगा।जबकि संचाई इसके विपरीत है । वो कमजोर नहीं बल्कि भटका हुआ जहां उसे सही रास्ता दिखाने की जरूरत है । स्वामी विवेकानंद जिनके जन्म दिवस को 'युवा दिवस ' के रूप में मनाया जाता है उनके जीवन से हमें प्रेरणा लेनी चाहिये विवेकानंद का पूरा जीवन दूसरो की सेवा करने में लगा रहा यहां तक की जब वो विदेश के दौरे पर गये तब भी वो अपने भारत देश को नहीं भूले। उनका शिकागो विश्व धर्म सम्मेलन में भाषण इतना अच्छा था जिस काऱण से पूरे विश्व भर में उनके नाम के साथ भारत का नाम भी प्रसिध्द हुआ। मुझें स्वामी विवेकानंद के जीवन को पढ़ते समय कुछ बाते बहुत ही प्रेरणादायक लगी 'ऐसा कोई भी काम नहीं है, जो तुम नहीं कर सकते तुम्हें उसे पूरा करने के लिये मेहनत और लगान की आवश्यकता है।' मुझें विवेकानंद का अपने गुरू के प्रति सम्मान वहां समर्पण बहुत सही लगा ' जिसमें वो कहते है कि मेरे काम की सफालता मेरे गुरू की देन है और मेरी गलतियां और कमियां सिर्फ मेरी है। ' आज इन बातो को सीखने की जरूरत हमें सबसे ज्यादा है हम अपनी सफालताओं को तो अपना मना लेते है किन्तु अपनी असफालता को किसी और के सिर पर थोप देते है।

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