जब मालूम है कि कुछ
पल के लिए ही हो तुम
यहाँ
तो कैसे काटोगें कुछ दिन
की रतियां
जब मालूम कुछ दिन ही देखोगें
या की गलियां
तो कैसे निहारों के यहाँ की
बालिया
जब मालूम है कुछ दिन ही निहार
पाओगे
यहाँ के पहाड़ और यहाँ की खूबसूरत वादियाँ
तो कैसे देखेगी तुम्हारी अखियां
जब इसकी भनक है तुम्हें कि
कुछ कुछ दिन ही गुजारोगें
यहाँ की रतियां
जब जान पड़ता है यहाँ से जानें का समय तो
कैसे कैसे काटोगें
हर दिन हर रतियां
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