नवरात्रि शब्द एक संस्कृत शब्द है। जिसका अर्थ नौ रातें है। एक वर्ष में चार बार नवरात्रि मनायी जाती है। जिसमें चैत्र नवरात्रि, शारदीय नवरात्रि और दो गुप्त नवरात्रि होती है। जिसमें सबसे बड़ी नवरात्रि शारदीय और चैत्र नवरात्रि होती है।
चैत्र नवरात्रि की उत्पत्ति की कथा
शिव पुराण के अनुसार एक महिषासुर नाम के
राक्षस ने भगवान ब्रह्मा को प्रसन्न करके ये वरदान मांग की कोई भी देवता या पुरूष उसको मरा नहीं सके वो हमेशा अमर रहे जिस पर भगवान ब्रह्मा ने कहा संसार में जो भी चीज़ आयी है उसको जाना आवश्यक है। तब वो कहता है कि मेरा वंध केवल एक स्त्री करेगी तब भगवान उसे वरदान देते हैं। वरदान के प्रभाव के चलते वो अपना आधिपत्य जमाने के लिए हर जगह आक्रमण करता है और अपना शासन जमता है। जिसके प्रभाव के चलते इंद्र का सिंहासन भी नहीं बचता तब देवता और असुरों के बीच भयंकर युद्ध होता है जिसमें देवता के अलावा भगवान ब्रह्मा और शिव भी अपनी सहभागिता करते हैं। किन्तु उस महिषासुर राक्षस से सभी परास्त हो जाते हैं।
तब सभी देवो ने माता पार्वती से महिषासुर का वंध के लिए प्रार्थना की माता पार्वती देवों की सहायता के लिए आगे आयी तब शक्ति स्वरूपा ने महिषासुर का वंध करने के लिए माता दुर्गा का रूप धारण किया
वही दूसरी ओर व़ो राक्षस माता से इतना आकर्षित हो जाता है कि वो माँ दुर्गा से शादी का प्रस्ताव रख देता है ।जब माता उसके सामने ये शर्त रखती है कि अगर तुम मुझसे से विवाह करना चाहते हो तो सबसे पहले तुम्हें मुझे से युद्ध करना होगा वो महिषासुर माता दुर्गा की बात मान लेता है और दोनों के बीच युद्ध होता है ।जो पूरे नौ दिन तक चलता है दसवें दिन माता उस महिषासुर राक्षस का वध कर देती है। और सभी जगह माता के नाम के जयकारे लगते हैं ।
तब से चैत्र माह में नवरात्रि की पूजा जाती है। माता नौ दिन अलग रूपों में अपने भक्त पर अपनी कृपा बरसती है ।
क्यों रखते हैं नवरात्रि में व्रत
वैसे तो माता रानी की पूजा करने के लिए पूरा साल होता परंतु नवरात्रि केवल और केवल माता रानी की पूजा के लिए होता है जो भी भक्त नवरात्रि का व्रत रखते हैं । उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है ।किन्तु अगर कोई स्वास्थ्य के चलते नौ दिन तक उपवास नहीं कर सकता तो वो नवरात्रि का जोड़ा व्रत भी करके माता रानी को प्रसन्न कर सकता है ।वो नवरात्रि का पहला और नवमे दिन का व्रत भी करके उनसे अपने इच्छित फल की प्राप्ति कर सकता है ।
कलश स्थापना और कन्या पूजन का क्यों है इतना महत्व
नवरात्रि में कन्या पूजन इसलिए किया जाता है। कि छोटी छोटी कन्या जिनकी उम्र 1 से 10 साल की हो वो माता रानी की रूप मानी जाती है इसलिए नवरात्रि में उनका पूजन किया जाता है और उन्हें अपने समर्थ के अनुसार दक्षिण दी जाती है। इन कन्याओं के साथ काल भैरव के रूप में एक कन्ना का भी पूजन किया जाता है। क्योंकि माता रानी के साथ काल भैरव की पूजा करना अनिवार्य होता है। इसलिए जहाँ जहाँ माता रानी का तीर्थ स्थल वहाँ काल भैरव का मंदिर जरूर है ।
कलश स्थापना की स्थापना करने से घर पर चारों तरफ सकरात्मक ऊर्जा का वास होता है ।
नवरात्रि से जुड़े नौ तथ्य जो सभी को मालूम होना चाहिए।
1. भगवान शिव की चार पत्नी थी जिनमें माता सत्ती, दुर्गा, उमा और काली है।
2. माता काली की उत्पत्ति माता सत्ती से हुई है।
3. नवरात्रि एक वर्ष में चार बार मनायी जाती है जिसमें दो गुप्त नवरात्रि भी होती है।
4. शारदीय नवरात्रि का सम्बन्ध श्री राम से है ।
5 वहीं रामनवमी का सम्बन्ध राम के जन्म से है भगवान श्री राम का जन्म चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी को हुआ था ।
6. माता की मूर्ति बनने के लिए थोड़ी सी मिट्टी एक वैश्या गृह से भी ली जाती है ऐसे मान्यता है कि जब एक पुरूष एक वैश्या घर में जाता है तो वो अपनी सारी अच्छाई को पीछे छोड़ देता है।
7 भारत में जितने माता के मंदिर नहीं उतने खंड पीठ है जिसका कारण यहाँ है ।कि माता सती के जहाँ जहाँ अंग गिरे वहाँ वहाँ खण्ड पीठ का जन्म हुआ ।
8. भारत में नौ देवी के तीर्थ स्थल भी है । जहाँ नवरात्रि में जाया जाता है जिसमें माता वैष्णव दैवी प्रमुख है ।
9 नवरात्रि में काले वस्त्र पहना जाना शुभ नहीं माना जाता है।
"इस नवरात्रि सभी इच्छा हो आपकी पूरी
ऐसी करें कामना हम
हो सभी परेशानी से आपकी दूरी
इस नवरात्रि हो आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी"
आप सभी को नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं
2021


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