होली पर क्या फिर होगी वहीं मस्ती
जो कभी थी हमारे लिए बहुत सस्ती
पर आज मालूम चली उसकी कीमत
बड़े खुशनसीब होते हैं वो लोग
जो अपनों संग तैयार मना रहे होते हैं
समय के साथ कुछ रिश्ते जैसे अजनबी से होते हैं
बड़ी मुश्किल से बनते है रिश्ते
त्यौहार का मतलब तो जैसे हम
तब ही समझते हैं जहां हमारे अपने
हमारे संग होते हैं
जहां खुशियों की क़ोई कमी न होती है
केवल गुलाल के रंग से सबके रिश्ते निखरते है ∣
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