एक कलाकार की व्यक्तिगत जिदंगी दिखाती है कागज के फूल


हम से कई  लोग फिल्म की दुनिया को देख बाकी सारी चीज  भूल जाते हैं और सोचते हैं कि ये दुनिया कितनी ज्यादा अच्छी है और इसमें कितनी चमक है लेकिन इस दुनिया के लिए ये कहावत बिल्कुल सही लगतीं है 'कि दूर के ढोल सुहाने लगते हैं.

जहाँ  ऊंचाई पर पहूंचने के लिए बहुत वक्त लगता है लेकिन नीचे गिरने में एक वक्त क्या एक मिनट भी नहीं.

इस दुनिया में केवल वो ही लोग अपने स्थान पर टिके  रहते हैं जो लगातार कोशिश करते हैं जिन्हें हार से डर नहीं लगता . 

* फिल्म इंडस्ट्री कोई भी कलाकार आता तो अपने मन से है पर जाता अपने मन से नहीं*.

" 'कागज के फूल मूवी' पूरी तरह से फिल्म जगत के एक ऐसे सच को प्रकट करती है जिसे बहुत कम ही लोग जानते समझते हैं."

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