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एक कलाकार की व्यक्तिगत जिदंगी दिखाती है कागज के फूल


हम से कई  लोग फिल्म की दुनिया को देख बाकी सारी चीज  भूल जाते हैं और सोचते हैं कि ये दुनिया कितनी ज्यादा अच्छी है और इसमें कितनी चमक है लेकिन इस दुनिया के लिए ये कहावत बिल्कुल सही लगतीं है 'कि दूर के ढोल सुहाने लगते हैं.

जहाँ  ऊंचाई पर पहूंचने के लिए बहुत वक्त लगता है लेकिन नीचे गिरने में एक वक्त क्या एक मिनट भी नहीं.

इस दुनिया में केवल वो ही लोग अपने स्थान पर टिके  रहते हैं जो लगातार कोशिश करते हैं जिन्हें हार से डर नहीं लगता . 

* फिल्म इंडस्ट्री कोई भी कलाकार आता तो अपने मन से है पर जाता अपने मन से नहीं*.

" 'कागज के फूल मूवी' पूरी तरह से फिल्म जगत के एक ऐसे सच को प्रकट करती है जिसे बहुत कम ही लोग जानते समझते हैं."

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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..