Earth Day: इसे आज की विंडम्बना कहें या इंसान का दोगलापन किन्तु सच्चाई यहीं है। प्रकृति ने जिस इंसान को जीवन यापन करने के लिए सबकुछ दिया। उस का ही वो आज दुश्मन बन बैठा है। जिस पर वो अत्याचार की सारी हदें पार कर रहा है। अपने हित के लिए वो कभी जंगल को कांट रहा है। तो कभी धरती को चीरते पानी निकल उसे लहुलहुहान कर रहा है।
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जब इसे भी उसका जी न भरा, तो वो विकास के नाम पर मिलियन टन प्लास्टिक का कचरा उस पर रख रहा है। बदलते फैशन के साथ खुद को अपडेट करने के चलते, खुद को सम्भल आज वो इंसान पृथ्वी (Earth) को बीमारु बना रहा है।
ये हाल बदलना होगा
आज जहां एक तरफ Climate Change के चलते मौसम में लगातार बदलाव हो रहा है। गर्मी के मौसम में पानी गिरना आज सामान्य सा हो गया है। वहीं दूसरी तरफ आज जनसंख्या के विस्फोट के चलते, प्रकृति संसाधनों का शोषण हद से ज्यादा हो रहा है। जहां न जल बच रहा है न जंगल।
ऐसे में अगर सबकुछ जानकर भी ये इंसान मौन रहा, तो वो दिन दूर नहींं है। जब इस प्रकृति के विनाश का कारण केवल वो ही होगा। जिस के लिए उसे आने वाली पीढ़ियां कभी माफ न करेंगी।
हमें बदलना होगा, अपनी उस सोच को खत्म करना होगा
आज हमें अपनी उस सोच को खत्म करना होगा। जहां हमें घर में सफाई, गार्डन में हरियाली, घर में साफ जल,शुद्ध हवा तो चाहिए। किन्तु दूसरी तरफ घर में सफाई कर प्लास्टिक का कचरा इधर उधर फेंक देने की हमारी आदत है। अपने गार्डन में चाहे जितने पेड़ लगा ले, पर अपनी सुविधा के लिए पेड़ों को काटने पर हम जरा भी विचार नहीं करते है। फिर चाहे गर्मी में उस पेड़ की छांव हमें कितनी न पसंद आये।
आज पानी का संकंट किसी से छिपा नहीं है। जहां आधी से ज्यादा आबादी स्वच्छ जल को तरस रही है। इसके बावजूद हमारे घर में मौजूद पानी का हम कितना दुरुपयोग कर रहे है । हमें अपनी इस आदत को खत्म कर पानी के संरक्षण के बारें में सोचना होगा।
शुद्ध हवा हर किसी को पसंद है। लेकिन उसे शुद्ध हवा को बनाये रखने के लिए ,हम एक प्रतिशत भी काम नहीं कर रहे है। आज समय की जरुरत है कि हम जानबूझकर उन गलतियों का न दोहराएं जो आगे चलकर हमारे विनाश का कारण बनें।

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