अक्सर हमें लगता है कि हम समय के साथ आगे बढ़ते जा रहे हैं∣ हमारा मुकाबला किसी ओर से नहीं बल्कि खुद से है∣ जहां हम और समय साथ- साथ चलते जा रहे हैं किंतु इसके विपरीत हमें सच्चाई तब मालूम चलती है∣ जब हम ऐसी जगह पर जाते हैं∣जहां हमारा लोगों से पहली बार ऐसे सामना होता है∣ जैसे हम उनके सामने कितने बौने है∣हम खुद को वो खाली बर्तन समझते है जिसमें जितना कुछ भी डाल दो वो खाली ही रह जाता है∣इस दुनिया की कड़वी सच्चाई हमें तब मालूम चलती है∣ हर जगह महत्व उसी चीज का है∣ जिसमें गुणवत्ता और आकर्षण दोनों है∣आज के प्रतियोगिता वादी युग में अगर हमें सफल होना है तो हमें उस जगह की पूरी जानकारी होनी चाहिए जिस जगह हम जाने का सोच रहे हैं∣ वरना सपने तो हर कोई चांद पर जाने का देखता हैं पर विश्व रिकॉर्ड तो जुनूनी और मेहनत ही लोग बना पाते हैं ∣
कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है। आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो।
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