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रेडियो एक जनसंचार का माध्यम है ∣ जिसकी पटकथा हमारे कानों और आंखों के लिए लिखी जाती है जिसमें केवल ध्वनि और आवाज के माध्यम से हम किसी विषय की विषय वस्तु को समझते हैं जिसमें समय की बहुत प्रतिबद्धता होती है∣
प्रत्येक साल 13 फरवरी को 'विश्व रेडियो दिवस 'मनाया जाता है जिसे मनाने की घोषणा यूनस्को ने 2011 में की थी जिनका कहना था कि " रेडियो एक ऐसा माध्यम है जो कमजोर तबकों की आवाज बनता है और असंख्यक लोगों तक अपनी बात पहुंचाता है ∣
रेडियो की शुरुआत 1900 से हुई थी 24 दिसंबर 1906 को कनाडा की वैज्ञानिक रेगिनाल्ड फेसेंडन ने अपना वायलिन बजाया था ∣ जो दूर समुद्र तैर रहे जहाजों में रेडियोसेट से उनकी आवाज सुनी थी इस तरह रेडियो का आरंभ हुआ था ∣
हालांकि इससे पहले भी रेडियो वेव्स के जरिए संदेश का आदान प्रदान होता था जो एक बार में केवल एक रेडियो स्टेशन पर होता था जब एक साथ क ई रेडियो स्टेशन पर संदेह भेजा गया तब इसने पब्लिक ब्राॅडक्रास्टिंग के आइडिया को जन्म दिया ∣
इसी क्रम में पहले विश्व युद्ध में रेडियो तरंगों का बहुत उपयोग हुआ धीरे धीरे दुनिया में रेडियो स्टेशन खुलने लगे इग्लैंड में बीबीसी की शुरुआत हुई ∣
आजादी के बाद भारत ने रेडियो का विस्तार कुछ इस तरह से किया कि जिसे देखकर यही कहा जा सकता है कि रेडियो हर घर की शान बन गया एक समय के बाद, क्रिकेट का मैच, हो या चुनाव का परिणाम या पुराने फिल्मी गीत सबकी पसंद सिर्फ रेडियो पर जाकर उस विषय को जानना होता था ∣
सन् 1990 में जब भारत में आर्थिक उदारीकरण का युग आया तो भारत में प्राइवेट टीवी चैनल के आने की बाढ़ सी आ गयी जिसमें सबसे पहली शुरुआत " सुभाष कश्यप " ने की ' जी न्यूज 'को लाकर
जिसका क्रम जारी रहा उस समय लोगों को ऐसा लगा कि रेडियो का सिलसिला तो लगभग खत्म सा हो गया जाएगा किन्तु समय के साथ रेडियो ने अपना विस्तार किया और समय के साथ खुद को बदला आज भी रेडियो प्रासंगिक बना हुआ है∣
आज समकालीन समय में भले हमारे और आपके लिए रेडियो कम प्रासंगिक हो गया हो किन्तु आज भी ग्रामीण क्षेत्रों और आदिवासी इलाकों में जहां अन्य साधन अपनी पहुंच नहीं बना पा रहे हैं ∣ वहां रेडियो अपनी पहचान बना रहा है और लोगों तक अपनी बात पहुंच रहा है जिसमें कम्युनिटी रेडियो भी अपना अहम योगदान दे रहा है∣
ये विषय चिंतन का हो सकता है कि रेडियो सरकार की आवाज बन चुका है कि नहीं जहां सरकारी नियंत्रण रहता है किन्तु इस बात से कोई मुंह नहीं फेर सकता कि उसकी प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है∣
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