विश्व रेडियो📻 दिवस

ADI

आप देख रहे हैं सखी सहेली

कृषि दर्शन, भारत की एक खोज जैसे कार्यक्रम कभी लोग सुना करते थे हर घर में रेडियो होना जब सामान्य सी बात नहीं थी तब उस समय रेडियो इतनी चर्चा में था कि दहेज के रूप में घर में रेडियो आना बड़े अभिमान का प्रतीक देता था 

जब घर में टीवी नहीं था तब रेडियो हुआ करता था जिसमें महात्मा गांधी से लेकर देश के प्रधानमंत्री क इसका उपयोग करके जनता के बीच संवाद करते थे जो आज भी एक सिलसिले वार रूप में चला आ रहा है जिसमें हम हर रविवार को प्रधानमंत्री के' मन की बात' के रूप में सुनते हैं.

रेडियो लोगों से न सिर्फ उनके काम की बात सरल माध्यम में करता है बल्कि उनके काम से जुड़े विषय पर भी लोगों से बात करता है बात भले पोलियो की दवाई की जागरूकता की हो या स्वच्छता की हो रेडियो ने अपनी भूमिका बखूबी निभायी है.

आज वर्तमान समय में रेडियो के क ई स्टेशन आ चुके हैं और सबसे अच्छी बात ये है कि आज कम्युनिटी रेडियो भी बड़ी सुर्खियों बटोर रहा है कम्युनिटी रेडियो ऐसी जगह पर जाता है जहाँ अन्य संचार के साधन नहीं पहुंच सकते ये एक भाषा बोली के लोगों को साथ में जोड़ता है और उनके अनुभव कहानी कहावतें को कहता है इसका उद्देश्य वाणिज्यिक लाभ कमाना नहीं है.

आज इसकी महत्ता इस बात से देख सकते हैं कि हम चाहे जो भी फोन खरीद ले उसमें रेडियो जरूर होता है.

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