चोट लगे


अक्सर हम सब की जिंदगी में एक घटना बहुत सामान्य सी होती है जो हमें लगती तो बहुत बुरी है किन्तु सुधार करने पर वही हमारे लिए वरदान बन जाती है.

हमारी जिंदगी में कोई न कोई ऐसा शक्स जरूर होता है जो हमारी छोटी छोटी गलतियों पर हमें टोकता है और कहता है कि ये तुम से नहीं होगा उस समय हमें वो इंसान बहुत बुरा लगता है क्योंकि उसने हमारी बुराई की हमारा अपमान किया किन्तु जब उन गलतियों को करना हम बंद कर देते हैं और हम काम में सुधार कर लेते हैं तब हमें उस इंसान के द्वारा किए गए अपमान की याद नहीं आती बल्कि हमें ये खुशी होती है कि हम ने उसकी बात को सुना और खुद में सुधार किया.

" याद रखिये मेरी बात का झूठी तारीफ से अच्छा सच्चे दिल से की गया अपमान काम आता है जो हमें बेहतर काम करने को मजबूर कर देता है "

पत्थर उसी पर पड़ता है जिस पर फल लगता है लोग भी उनकी बुराई करते हैं जो कुछ कर रहे हो . 

जिंदगी में क ई चोटे लगती है ये हम पर निर्भर करता है हम उसे किस तरह लेते हैं.

* कोशिश कीजिये काम कीजिये दूसरे को दोष देना छोडिये भाई साहब दुनिया उसी की है जिसने दूसरों की आलोचना  को खुद की ताकत बनाया है*

अगली बार चोट लगे तो रोने से पहले थोड़ा रूककर ये सोचिएगा  

" कड़वा लेकिन सच है कड़वी बाते भले दिल को चुभती है किन्तु वो हमारे लिए वो होती है जो हमें बेहतर करने को विवश करती है."

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