Skip to main content

बेटी

 

बेटी जिसकी परिभाषा भले ही आज बदल गयी हो किन्तु उस बेटी का आज भी उतना ही महत्व है जितना की पहले था.

 भारत में बेटी को घर की लक्ष्मी कहा जाता है और नवरात्र में उसे देवी माँ का रूप समझा जाता है.

आज हमारे सामने कई ऐसे उदाहरण पेश हुए हैं जिसने हमें ये बताया है कि अगर वो चाहे त़ो हर कुछ सम्भव है भले फिर वो बैडमिंटन में पी वी सिंधु हो, मुक्केबाजी में मैरी कॉम हो या प्रधानमंत्री के तौर पर शेख हसीना, तो वहीं सबसे ताकतवर महिला के रूप में जर्मनी की चांसलर एंजेला डोरोथी मर्केल सब जगह उसने अपनी पहचान बनाई है.

आज मौजूदा समय में हम सब को अपनी इस बेटी के सपनों को पूरा करने के लिए उसे एक मौका देना है साथ ही साथ उसके साथ होने वाले अपराध को खत्म करने के लिए फास्ट ट्रक कोट  बनाने पर जोर देना है  जहाँ पर जल्द  से जल्द अपराधी को सजा मिले और ऐसे अपराधों में कमी लायी जाएं.

"हर घर का अभिमान है बेटी

पिता के सिर का ताज है बेटी

कभी लक्ष्मी तो कभी दुर्गा का "अवतार है बेटी,"

Comments

Popular posts from this blog

Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..