बेटी

 

बेटी जिसकी परिभाषा भले ही आज बदल गयी हो किन्तु उस बेटी का आज भी उतना ही महत्व है जितना की पहले था.

 भारत में बेटी को घर की लक्ष्मी कहा जाता है और नवरात्र में उसे देवी माँ का रूप समझा जाता है.

आज हमारे सामने कई ऐसे उदाहरण पेश हुए हैं जिसने हमें ये बताया है कि अगर वो चाहे त़ो हर कुछ सम्भव है भले फिर वो बैडमिंटन में पी वी सिंधु हो, मुक्केबाजी में मैरी कॉम हो या प्रधानमंत्री के तौर पर शेख हसीना, तो वहीं सबसे ताकतवर महिला के रूप में जर्मनी की चांसलर एंजेला डोरोथी मर्केल सब जगह उसने अपनी पहचान बनाई है.

आज मौजूदा समय में हम सब को अपनी इस बेटी के सपनों को पूरा करने के लिए उसे एक मौका देना है साथ ही साथ उसके साथ होने वाले अपराध को खत्म करने के लिए फास्ट ट्रक कोट  बनाने पर जोर देना है  जहाँ पर जल्द  से जल्द अपराधी को सजा मिले और ऐसे अपराधों में कमी लायी जाएं.

"हर घर का अभिमान है बेटी

पिता के सिर का ताज है बेटी

कभी लक्ष्मी तो कभी दुर्गा का "अवतार है बेटी,"

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