भोपाल। क्या हम आज के समय में 15 घंटे या उससे ज्यादा काम कर सकते है? हम में से ज्यादा का जबाव न होगा पर क्या आप जानते है एक वक्त ऐसा भी थी जब आधुनिकरण के चलते मजदूरों को बिना किसी छुट्टी के 15-15 घंटे काम करना पड़ता था। लेकिन आज हम केवल आठ घंटे काम कर रहे है। और सप्ताह में एक दिन का अवकाश ले रहे है। ऐसे में आज हम आपको बताएंगे आखिर कैसे हुई इसकी शुरूआत और क्यों हम पढ़ना चाहिए मजदूर दिवस का इतिहास?
जानें क्या कहता है इसका इतिहास
आपको बता दें कि विश्व मजदूर दिवस का उदय संयुक्त राज्य अमेरिका में सन् 1886 में हुआ था। जब 4 लाख से ज्यादा मजदूरों ने 1 मई को सामूहिक हड़ताल की थी। और काम के घंटे आठ करने की मांग की थी। मजदूरों की प्रमुख मांगों में सुरक्षित कार्यस्थल, निष्पक्ष वेतन और निश्चित काम के घंटे तय करने की मांग की गयी थी। इस बीच पर लाठीचार्ज किया गया। बड़ी संख्या मजदूरों की मौत हुई। जिसके बाद अंतराष्ट्रीय श्रमिक संगठन ने उनकी मांगों को लेकर संज्ञान लिया और उनके काम के घंटे तय किये। जिसके परिणाम स्वरूप आज हम आठ घंटे काम कर रहे है।
दुनियाभर में मजदूर दिवस किया जाता है सेलिब्रेट
बता दें कि आज के दुनिया देशभर के मजदूर संगठनों के द्वारा रैली निकाली जाती है । कई सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। इस दिन दुनिया भर में उनके काम के महत्व को रेखांकित किया जाता है। उनके सम्मान में भाषण दिया जाता है।
महिलाओं को लेकर रखी गयी थीम
हर साल इस दिवस को लेकर एक थीम रखी जाती है। इस बार की थीम में महिलाओं को मजदूरों को ध्यान में रखकर थीम निश्चित की गयी है। जिसमें उनका मानसिक स्वस्थ और उन्हें समान काम के लिए समान वेतन देने पर जोर दिया गया है।
भारत में मजदूर दिवस का उदय
आज जो हम आठ घंटे काम कर रहे है । हर हफ्ते एक छुट्टी ले रहे है। वो सब मजदूर दिवस का ही परिणाम है। लेकिन भारत में 1 मई 1923 लेबर किसान पार्टी ऑफ हिंदुस्तान ने मद्रास में इसकी नींव रखी थी। उनके योगदान को ध्यान में रखते हुए लाल झंडा फहराया था। जिसका नेतृत्व वांमपंथी और सोशललिस्ट पार्टी ने किया था।

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