किताबें हम बचपन से पढ़ते आ रहे हैं लेकिन पाठ्यक्रम से अलग हटकर किताबों का किस्सा बेहद खास है। जहां साहित्य की किताबें पढ़कर हम एक नया अनुभव करते हैं। जो हमें क ई अनुभव कराती हैं। उसमें होते तो काले काले शब्द ही है। लेकिन उसको पढ़कर हम एक अलग ही दुनिया में चले जाते हैं।
तो वहीं किसी विषय की किताब पढ़ने पर हम उस विषय के बारे में क ई रोचक जानकारियों को पढ़ते हैं।
आज के समय में जब सोशल मीडिया ने किताब पढ़ने की प्रवृत्ति को बहुत सीमित कर दिया है ऐसे समय में हमें किताबों को केवल सोशल मीडिया में पोस्ट करने के लिए नहीं बल्कि सच में पढ़ने के लिए खरीदनी चाहिए।
कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है। आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो।

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