गर्मी अभी शुरू ही हुई थी कि हम सब हाय ये गर्मी करने लगे। जहां गर्मी ने सबका हाल बेहाल कर रखा है। जहां दिन नहीं रात भी गर्म होने लगी है। जहां इंसान को कहीं भी नहीं मिल रहा चैन है।
अगर ऐसा ही चलता रहा तो वो दिन दूर नहीं जब हम आधुनिकता में फंसे वो इंसान हो जाएगा जो हर चीज को शुद्ध के नाम पर देखेंगा लेकिन उसे शुद्ध कुछ भी नहीं मिलने वाला है।
आज हम जो परेशानी महसूस कर रहे हैं उसका कारण हमारा भूतकाल में किया गया काम है। और आगे जो हम करेंगे उसका परिणाम हमें भविष्य में भुगतान होंगे । ऐसा ही चलता रहा तो वो दिन दूर नहीं जब हम धरती पर रहने के काबिल नहीं बचेंगे।
अब भी देर नहीं हुई हमें कुछ नहीं तो फिलहाल पेड़ों को काटने से रोकना होगा। पानी के दुरुपयोग पर पूर्णत पाबंदी लगानी होगी वरना हमें इसके और भी दुरुगामी परिणाम भुगतने होंगे।

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