सोनम का नाम लेते ही आपके दिमाग में क्या आया। सोनम रघुवंशी केस जिस नवविवाहित ने हनीमून के बहाने अपने पति राजा रघुवंशी को मौत के घाट उतार दिया। जिस कहानी को आप में से कोई भी नहीं भूल पाया होगा। लेकिन क्या एक सोनम को देखकर सभी लड़कियों को एक ताराजू में तौल लेना सही है।जहां आज हर लड़की में लोगों को सोनम दिखाई दे रही है मानती हूं कि आज लड़कियां हर क्षेत्र में लड़कों से कंधे से कंधे मिलकर चल रही है जहां अपराध के मामले में भी वो कदम से कदम बढ़ा रही है पर इसका मतलब ये नहीं की वो सही कर रही है। महिलाओं को पुरुषों से अच्छी चीजें सीखनी चाहिए न कि उनसे अपराध जैसी गंदी चीज़ लेकिन क्या एक सोनम को देखकर पूरी महिला जाति को न्याय के कटघरे में लाकर खड़ा कर देना सही है। जहां वो कातिल ही नजर आए ये जरूरी तो नहीं कि हर महिला सोनम ही बने।
कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है। आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो।
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