Skip to main content

DELHI MAJLIS PARK AREA IN FIRE: दिल्ली के मजलिस पार्क में लगी भीषण आग



भोपाल। खबर राजधानी दिल्ली से है। जहां पर मजलिस पार्क में अज्ञात कारणों से भीषण आग लग गयी। जो लगातार बढ़ती जा रही है। सूचना मिलने पर फायर बिग्रेड की कई गाड़ियां मौके पर मौजूद है। वो आग को बुझाने का प्रयास कर रही है। फिलहाल आग पर काबू पाते नजर नहीं आ रही है। दूसरी तरफ आग जंगलों की ओर बढ़ रही है। जो लोग की परेशानी को और भी ज्यादा बढ़ रही  है। 

मजलिस पार्क के वन क्षेत्रों में लगी आग

बता दें कि राजधानी दिल्ली के मजलिस पार्क के वन क्षेत्रों में अज्ञात कारणों से आग लग गयी। जिसे बुझाने के लिए फायर बिग्रेड की गाड़ियां और स्थानीय लोग युद्धस्तर पर लगे हुए है। आस पास के क्षेत्रों में आग न लग जाएं इसके लिए फायर बिग्रेड की गाड़ियां और स्थानीय लोग आग बुझाने में जुटे है। फिलहाल अभी तक आग लगने का कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है।

गाजियाबाद में केमिकल फैक्ट्री में लगी आग

इससे पहले दिल्ली से लगे यूपी के गाजियाबाद में किन्हीं कारणों से केमिकल फैक्टी में भीषण आग लग गयी थी । सूचना मिलने पर फायर बिग्रेड की 10 गाड़ियां घटनास्थल पर पहुंची और आग बुझाने में लग गयी। करीब डेढ़ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया है। फिलहाल आग से किसी के हताहत होने की खबर सामने नहीं आयी है।

देश में हर दिन कई जगह लगती हैं आग

बता दें कि देश में हर दिन दस से 15 आगजनी की घटनाएं सामने आती है। जिनमे आग लगने का कारण अभी शॉर्ट सर्किट, कभी ईवी व्हीकल
तो कभी जंगल में लगने वाली आग होती है। जिसके कारण बड़ी संख्या में जान माल की हानि होती है।

गर्मी में क्यों लगती है ज्यादा आग

अपने देखा होगा कि बाकी मौसम की अपेक्षा गर्मी में आग लगने की घटनाएं औसतन ज्यादा होती है। जिसे हम आमतौर पर सामान्य मान लेते है। लेकिन ये इतनी सामान्य होती नहीं है। बता दें कि गर्मी में आग लगने की घटनाओं का प्रमुख कारण तापमान बढ़ना, बिजली के उपकरणों का अधिक उपयोग करना साथ ही एसी, कूलर के ओवरलोडिंग से शॉर्ट सर्किट की घटनाएं बढ़ जाती है।







Comments

Popular posts from this blog

Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..