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Bhimrao Ambedkar:भीमराव अम्बेडकर को गाली देने से पहले




कल देश भर में भीमराव अम्बेडकर की जयंती मनाई जाएगी। जिसको लेकर तैयारियां जोरों शोरों से की जा रही है। दूसरी तरफ कुछ लोगये कहते नजर आएंगे कि अरे भीमराव अम्बेडकर ने ऐसा किया ही क्या था जिसके लिए उनको इतना सम्मान दिया जा रहा है। उन्होंने संविधान थोड़ा ही न लिखा है। और ये कहते कुछ लोग उन्हें गालियां देंगे।

लेकिन ऐसा बोलते समय वो ये भूल जाएंगे कि आज 2026 में भी जब हम खुद को आधुनिकता का सबसे बड़ा प्रतीक समझते हैं। तब हम जाति नहीं भूल पाते हैं। जहां हमारे लिए किसी व्यक्ति के नाम से ज्यादा उसका सरेनाम जरूरी हो जाता है। ऐसे समय में हम भीमराव अम्बेडकर को कैसे गाली दे सकते हैं जिन्होंने उस समय अपने जीवन में बेहतर किया जब उन्हें शिक्षा का मूलभूत अधिकार नहीं था। जब उनके लिए किताब उठाना भी पाप था। ऐसे समय में भीमराव अम्बेडकर ने न सिर्फ ज्ञान अर्जित किया । बल्कि देश‌ एक उच्च कोटि का संविधान दिया।
मैं मानती हूं कि उनका कुछ ब्राह्मणों ने साथ दिया था जिन्होंने उनको अपना सरेनाम तक दे दिया था। लेकिन वो सिर्फ कुछ प्रतिशत थे। जिन्होंने जाति से ऊपर मानवता का फर्ज निभाया था।
आज के समय में जब हम उनको ये कहकर गाली देते हैं न कि उन्होंने क्या किया तो हमें ये समझना चाहिए उन्हें अपने जीवन की विपरीत परिस्थितियों में भी वो सब किया जो सामान्य परिस्थितियों में भी करना मुश्किल है। जिन्होंने विदेश तक मैं देश का परचम लहराया। जिनका अगर हम सम्मान नहीं कर सकते तो हमें गाली देने का भी कोई अधिकार नहीं है ‌।


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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..