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Asha Bhosle:नहीं रहीं सुरों की मल्लिका आशा भोसले


सुरों की मल्लिका कही जाने वाली आशा भोसले का 92 की उम्र में निधन हो गया है। उन्होंने मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में अंतिम सांस ली। जानकारी के मुताबिक उन्हें सांस की परेशानी थी। तबियत ज्यादा खराब होने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया था। जहां आज इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। उनके बेटे आनंद भोसले ने बताया कि पूरे हिंदू रीति-रिवाज से आशा भोसले का कल शाम 4 बजे अंतिम संस्कार किया जाएगा।


12000 से ज्यादा गाएं गीत 


आशा भोसले का जन्म 1933 में महाराष्ट्र में हुआ था। मात्र 10 साल की उम्र में उन्महोंने राठी फिल्म में अपना पहला गीत गाया था। जिसके बाद हिन्दी में चुनरिया मूवी में उन्होंने गीत गाया था।आशा भोसले ने 14 भाषाओं में 12000 से ज्यादा गीत गाएं। उन्हें उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए पद्मविभूषण, दादा साहब फाल्के पुरस्कार के साथ देश के प्रतिष्ठित क ई पुरस्कार से नवाजा गया।
इसके अलावा वो ग्रैमी पुरस्कार से नामांकित होने वाली पहली भारतीय बनी। जो संगीत की दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों में से एक है।

वहीं उनके प्रसिद्ध गीतों में एक तुम्हीं नहीं तन्हा , दम मारो दम, लग जा गले जैसे मशहूर गीत है जिसके जरिए लोगों के बीच वो आज भी जिंदा है।
अगर उनके बारे में हम बात करें तो आशा भोसले ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा था एक कि कलाकार के जीवन में जितना संघर्ष होता है उसका काम के प्रति जुनून उतना ज्यादा होता है जो उन्हें शीर्ष पर ले जाता है।
आज भले ही वो हमारे बीच में मौजूद नहीं है लेकिन उनका जीवन हमारे लिए एक प्रेरणा है कि अगर आपको अपने जीवन में बेहतर बनना है तो शिकायतें खत्म कर आपको आगे जाना होगा। उसके लिए हर हाल में आपको अपने सपनों के लिए वक्त देना होगा।


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