हम जनरल वाले है न... इसलिए हमें ज्यादा पर्सेंट लाना होगा..ये बात कहते अक्सर अपने सुनी होगी..जहां हमारे देश में यूजीसी कानून क्या आया..एक बार फिर देश में जातिवाद पर बहस तेज हो गयी है..
जात से मतलब आपकी जाति..जो आपके मरने के बाद भी नहीं जाती..आपका नामकरण से लेकर क्रिया क्रम सब इस हिसाब से होता है कि आपकी जाति क्या है..वो बात अलग है..कि कोई भी किस जाति का है..उसे दफनाया ही जाता है..रखा नहीं जाता..उसके पास कितनी भी धन-दौलत हो लेकिन वो खाली हाथ आता और खाली हाथ ही जाता है..
ये बात गौर करने वाली है कि जब से देश में यूजीसी का नया कानून आय़ा है..तब से देश में एक बार फिर जातिवाद को लेकर बहस तेज हो गयी है..
जहां एक वर्ग यूजीसी के नये कानून का ये कहकर विरोध कर रहा है कि उसके चलते सवर्ण वर्ग के साथ शोषण होगा.वहीं दूसरा वर्ग उसका ये कहक र समर्थन कर रहा है.कि उसके जरिए शोषितों को न्याय मिलेगा..जिसको लेकर अभी हाल फिलहाल यूजीसी ने रोक लगा दी है....मामले में सुप्रीम कोर्ट 19 मार्च को सुनवाई करेगी..
लेकिन इस कानून ने देश में ये बहस तेज कर दी है..कि देश में क्या आजादी के 70 साल बाद भी जातिवाद खत्म नहीं हुआ.जहां आज भी व्यक्ति की जाति देखकर उसके साथ बातचीत की जाती है..उसको कितनी इज्जत दी जानी है ये बात उसकी जाति से तय होती है...हालांकि शहरी इलाकों में जातिवाद गांव की अपेक्षा कम देखने को मिलता है..लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि देश में जातिवाद पूरी तरह से कम हो गया है..
रही यूजीसी कानून की बात तो इस कानून को लागू किया जाना जरूरी है.क्योकि ये कानून उन वर्गों को समानता देने के साथ सम्मान की बात करता है..जिन्हें जाति के आधार पर आज भी कई प्रकार की परेशानी झेलनी पड़ती है...इस बात को ध्यान में रखते हु्ए कि भले ही हम चांद तक पहुंच गए हो..लेकिन हमारी सोच आज भी वहीं तक है..कि आखिर तेरी जाति क्या है...
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